आद्या, तुम सबसे पहली हो

तुम प्रकृति की पहली नारी
आँगन की पहली किलकारी
मम्मा की तुम पहली सृष्टि
ज्यूँ मरुस्थल की पहली वृष्टि

पापा के मस्तक की तुम आन
निज वंश का हो तुम पहला मान
प्रथम लालिमा अम्बर पर
मधु कलरव का तुम पहला स्वर

नानी के उर का पहला प्राण
नानू की तुम स्नेहिल मुस्कान
नन्हें नन्हें तुम प्रथम चरण
पहले नुपुर, पहली छनछन

हर मासी का तुम स्नेह प्रथम
पाया बचपन ने नया जनम
रहो सदा तुम यूँ ही शीर्ष
तुमको सदैव ये शुभाशीष