वो कशिश जो है तेरी आँखों में
वो इधर भी है मेरी साँसों में
वो जो जल रहा कुछ तुझमे है
है सुलग रहा वही मुझमे भी

जो ख़ाक कर दे जिस्मों को
ये तपिश नहीं उन शोलों की
रौशन हैं जिनसे लाखों ख्वाब
है ये नूर ऐसे चिरागों का

है न एक लफ्ज़ भी दरम्यां
ना तू मेरा है ना मैं तेरा हूँ
पर ख़ामोशी कर दे बयां
बस मेरा तू और तेरा मैं

कुछ अनकही, कुछ अनसुनी
ऐसी तेरी मेरी कहानी है
ना समझ इसे, महसूस कर
ये कहानी जन्मों पुरानी है