क्या हैं मेरे बाजुओं मे पर सिले हुए?
या कि  पैरों मे कहीं पहिए लगे हुए?

एक लम्हा क्यू कहीं भी मैं ठहर पाती नही?
एक पल को क्यू कहीं भी थम मैं पाती नहीं?

तिनका पत्ता जोड़ कर एक घोंसला बनाया था
जज़्बा लम्हा खर्च कर कुछ दोस्त भी बनाए थे

वक़्त के पहिए ने फिर करवट यूँ ले ली है मगर
पग पुराने छोड़ कर हम बढ़ गये नई राह पर

नीड पीछे छोड़ कर फिर उड़ चली हूँ मैं
एक नये फिर घोंसले को बढ़ चली हूँ मैं

फिर से तिनके जोड़े हैं, फिर घर नया बसाएँगे
नये फिर उत्सावों के अवसर कई बनाएँगे