दिल करता है मैं उड़ आऊं तेरे पास मैं बैठूँ
तेरा हाथ पकड़ लूँ थोड़ा तेरे भीतर पैठू

तेरी चुप्पी से मैं तेरे मन की बातें सुन लूँ
तुझको गले लगा कर तेरा दर्द मैं थोड़ा चुन लूँ

तेरी आँखों  ख़ालीपन को थोड़ा सा भर दूँ
दुःख तेरा मैं बाँट लूँ तेरे नाम मैं खुशियां कर दूँ

दूर यूँ बैठी कभी कभी मैं विकल बहुत हो जाती हूँ
तुमसे ही फिर सम्बल ले मैं खुद को समझाती हूँ

कठिन घड़ी है मगर यकीं है तुम उबर ही आओगी
आत्मसात कर दर्द को अपने फिर से मुस्काओगी