पहला उत्सव आज तुम्हारे
मान में बिटिया रानी
तयान भैया ने देख सपने में तुमको
सुबह डड्डा को उठाया होगा
और यकीन है मुझे ये भी
सिया दीदी ने एक कार्ड तो बनाया होगा
इसलिए नहीं कि अधिकार है
तुम पर हमारा
पर इसलिए, कि हम सब पर
अधिकार है तुम्हारा
क्यूंकि माँ की गोद में उतरने से पहले
तुम उतर गयी हम सबके दिल में
घर कर गयी उस कोने उस कोने में
लाड़ बसता है जहाँ

देखा है मैंने तुम्हे अक्सर
जागती आँखों के  सपने में
पोपली मुस्कान समेटे
मुम्मा सी प्यारी, खिलखिलाती
देखा है मैंने, चेहरे पर तुम्हारे
सौम्य, निश्छल, दादी का साया
और देखा है मन मोहते
बिलकुल पापा के अंदाज़ में,
चुलबुली, चुहलबाज़ और अनुरागी
और देखा भी है पैंचो को
तुम्हारा झूला झुलाते
और सभी आंटी अंकल को
तुम्हे हर ओर से घेर कर
एक समूह में लोरियाँ गाते

क्या आशीष दूँ  मैं तुम्हे
तुम तो स्वयं साक्षात देवी स्वरुप
हमारी प्रार्थनाओं का साकार रूप
तुम तो हम सब की झोली
अपने स्नेह से भरने आई हो
तुम तो हमारे जीवन में
एक अलग ही रंग भरने आई हो
और हम बैठे हैं इंतज़ार में
तुम आओगी
हमें  देख कर मीठा सा
तुम मुस्कराओगी
हम देखा करेंगे तुम्हे
स्नेह में सराबोर हो जायेंगे
शायद धरती पर स्वर्ग पा जायेंगे