शहीद नाम नहीं चाहता
नहीं चाहता है वो हमारे आंसू
शहीद नहीं चाहता ´वायरल´ होना
न चाहता है लगाएं हम ´प्रोफाइल´ पर
उसके नाम का तिरंगा

शहीद नहीं गिनता अपनी साँसें
ना ही तौलता है वो अपनी जान
फ़ौज के राशन
सेवा की पेंशन
या सियाचिन की ठंड से

शहीद नहीं देखता सूनापन
बूढ़े माँ-बाप की आँखों का
दुधमुहे बच्चे के बचपन का
वेदना शून्य भाई-बहन का
मांग और कलाई अपनी दुल्हन का

शहीद चाहता है खुला आसमान
आज़ाद साँसे, देश स्वतंत्र
दुश्मन की हार चाह करता है वार
शहीद तो बस चाहता है
विजय या वीरगति

तो चलो ना
अब हम आज़ाद हो जाएँ
अपने दिल में तिरंगा लहराएँ
चलो ना
उसकी शहादत के क़ाबिल बन जाएँ