अब याद नहीं शामें कैसी थी तेरे संग
अब याद नहीं बातें क्या करते थे हम तुम
हम भूल गए घर की वो रौनक जब तुम थे
हम भूल गए हैं खेल, ठहाके, पागलपन

तुम जो ना हो आँगन की धूप भी धुंधली है
तुम जो ना हो बारिश में भी है सूनापन
आ जाओ कुछ उन यादों को ताज़ा कर लें
आ जाओ कि कुछ यादें और बना लें हम