फटे बांस को सुना आज
सुरों से सराबोर
राह चलते जो सुरों का
एक शहंशाह मिल गया
जाने दीवानगी थी
उन फ़िज़ाओं में
या जादू था सचमुच
उसकी साँसों में
कि टूटा हुआ साज़
होठों पे थिरकता था
उखड़ी हुई साँसे कुछ
उस बांस में ज़िंदा थीं