आज घर वापस आये हम
साथ लाये, माँ के हाथ की घी
ननद की बाँधी हुई मसाला मैगी
माँ के दर्द के तेल की महक
उसे मालिश न कर पाने की कसक
पापा के आँखों की थोड़ी उदासी
नम उन आँखों से बूंदें ज़रा सी
अपने देश की कुछ मिठाई
थोड़ी सौंफ़, मेथी, राई
बच्चों की तोतली बोली
यादों से भरी वो झोली
ज़िन्दगी भर की कुछ बातें
कुछ अधूरी सी मुलाकातें
थोड़े चावल – ख़ुशबू वाले
कुछ दाल, कुछ मसाले
सुलगी हुई कुछ शामें
बचपन – जो थी उस हवा में
कुछ और रुक जाने की चाहत
फिर लौट जाने की हसरत
हाँ….आज घर वापस आ गए हम