दूर चले जाते हो तब भी
तुम साथ रहते हो।
मेरी छोटी-लम्बी राहों पर
तुम साथ चलते हो।

कोसों दूर भले हो
मेरी बाहों में रहते हो।
मैं जब जब साँसें लेती हूँ
तुम धड़कन में चलते हो।

जब खड़ी रसोई में होती हूँ
पीछे से आ जाते हो।
मेरा मीठा-तीखा-खट्टा सब
तुम चखते जाते हो।

मेरे अनलिखे गीतों को
तुम गुनगुनाते हो।
मेरी बचकानी बातों पर
तुम मुस्कराते हो।

मेरी सारी कविताओं में
तुम आत्मसात हो जाते हो।
मेरे उठते-गिरते जीवन में
तुम समतल लेकर आते हो।

मैं अपना दर्द सुनाती हूँ
तुम सुनते रहते हो।
मेरे सपने सारे जानते हो
मेरे मन में रहते हो।