पिछले रविवार को
बिस्तर पर ही मिले मुझे
चाय और नाश्ता।
मेरी बेटी लायी थी,
अपने हाथों से बना कर।
मेरा दिन जो था वो –
माँ का दिन।

देखा होगा आपने भी
सड़कों पर, दुकानों में –
माँ-बच्चों की भावुक तस्वीरें।
माँ के लिए सुन्दर उपहार,
माँ के लिए ख़ास अनुभव …
बहुत बड़ा दिन जो होता है
माँ का दिन।

और देखा भी होगा
सोशल मीडिया पर –
माँ के नाम भावपूर्ण लेख,
माँ के आँचल की महिमा,
गाथाएँ – माँ के बलिदान की।
क्यूँकि था ना उस दिन –
माँ का दिन।

इस रविवार भी मिली मुझे
चाय – बिस्तर पर।
मेरी बेटी को नहीं चाहिए
आँचल वाली, ममतामयी माँ।
जानती है वो, पर मानती नहीं
कि ख़त्म हो चुका है
माँ का दिन।