तूफ़ान
सदा तो नहीं रहता।
एकाएक आता है
कुछ ही पलों के लिए।
हाँ, छोड़ जाता है
अपने पीछे अपने निशान।
उजड़े हुए शहर,
वीरान बस्तियाँ,
ईंट ईंट में बिखरी इमारतें।
चकनाचूर कलेजे पर
रह जाते हैं
अनदेखे घाव कई।
वक्त थम जाता है
वहीं, उस तूफ़ान पर।

पर तूफ़ान
सदा तो नहीं रहता।
ज़िन्दगी चलती जाती है
बदल कर रफ़्तार –
अटकी साँसों के सहारे।
शोक नहीं मनाती ज़िन्दगी;
न रुक जाती है
डर की बेड़ियों से।
दरकी दीवारों से
नईं कोंपल फूटती हैं।
धड़कन स्थिर हो जाती है,
टूटे टुकड़े जुड़ कर
कुछ नया बनाते हैं ।
तूफ़ान कभी भी
विध्वंस नहीं करता –
आगे की राह साफ़ कर
गुज़र जाता है बस।