ये जो धुआँ
तुम अपनी साँसों में भरते हो मेरी जान;
एक दिन धुआँ कर देगा तेरी जान।
और ये ना समझना
कि राख़ बस तुम होगे।
उस आग में जल जाएगी तुम्हारी माँ
और उसके अरमां।
होंठों से लगा रखी है
जो ये मौत की चिंगारी;
दिल भी जलाती होगी शायद…
एक दिन जला देगी ये
तेरी नन्हीं सी जान की मुस्कान।
कश-ब-कश ज़ाया जो करते हो
उम्र अपनी;
हरेक कश तेरी यूँ नाग़वार होती है।
बेइंतहा ग़म हैं; भुलाने को पिये जाते हो…
तुम्हें हर ग़म की क़सम-
हमारा ग़म कभी न करना तुम।
जी लेंगे तेरे बग़ैर यूँ हम,
कि कानोकान ना भनक होगी
ज़िन्दगी क्यूँकर दुश्वार होती है।