एक सुदामा आए थे।
उबला हुआ धान कूट वह
भर गठरी में लाए थे।
कुछ लज्जित से खड़े सुदामा,
देख कृष्ण मुस्काए थे।
आगे बढ़ कर वासुदेव ने
उनको गले लगाया था।
बड़े प्रेम से छीन के गठरी,
चूड़ा हरी ने खाया था।

युग बीते हैं, हुई उन्नति,
आज श्रमिक क्या खाता है ?
प्याज़-नमक संग सत्तू-चूड़ा
कभी-कभी गुड़ पाता है ।
क्या चूड़ा खाता निर्धन अब भी
गले लगाया जाता है?
नहीं – आजकल अन्य देश का
उसे बताया जाता है ।