वो लड़का
जिससे मोहब्बत की थी मैंने
तुम वो तो नहीं हो।
बहुत बदल गए हो तुम।
इश्क़ के इम्तिहान
अब नहीं देते तुम।
न मेरी आँखों में ही
अपनी दुनियाँ बताते हो।
इतने बरसों में,
अनगिनत दिन-महीनों में,
हमारी दुनियाँ बड़ी जो हो गयी है।
नहीं कहते तुम अब
कि मैं ही सबकुछ हूँ तुम्हारा –
कई रिश्तों में फैल गए हो,
और यथासंभव निभाने लगे हो
रिश्तों की ज़िम्मेदारियों को।
समय ने भर दिये हैं
लड़कपन के निशान।
बालों की सफ़ेदी में मगर
तुम्हारी मासूमियत
अब भी अटकी है कहीं।
वादे नहीं करते तुम,
और कई बार भूल भी जाते हो,
किये हुए वादों को।
लेकिन जीवन में बहुत कुछ
तुमसे ही स्थिर है।
मेरे सबसे अच्छे दोस्त नहीं,
मेरी सारी बातें भी नहीं जानते;
हमेशा हाथ पकड़ कर
साथ-साथ नहीं चलते अब।
पर रहते हो आसपास,
किसी अक्खड़ जादूगर की तरह –
ऐन मौक़े पर ही आकर
जादू चला जाता है जो –
बिन बोले, बिन बताए।
सर्वोत्तम नहीं हो तुम,
लेकिन मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ हो।
तुम्हारे साथ
बेझिझक मैं, मैं रह सकती हूँ,
तुम्हारे साथ
बेधड़क मैं अपने सपनों को
हवा दे सकती हूँ ।
वो लड़का
जिससे मोहब्बत की थी मैंने
तुम वो तो नहीं हो।
मगर तुम वो ज़रूर हो
जिसके साथ
हर बदलते वक्त में
मोहब्बत के बदलते मायनों को
महसूस किया है मैंने