मन में जब कोई बात उठे,

तब लोक लाज में मत बंधना।

ना शिष्टाचार में तुम पड़ना।

बरसों शायद ना बात हुई हो,

पहचान इंस्टा-फेसबुक तक ही हो।

एक संदेश मुझे तुम देना भेज –

मैं बाँट समय थोड़ा लूँगी,

कुछ बातें तुमसे कर लूँगी।

 

अपने गीत सुनाना मुझको।

जब गीत के बोल ना सुन पाओ,

जब ताल, राग, ना धुन पाओ।

कुछ शब्द मैं तुमको दे दूँगी,

कुछ लय और स्वर तुमसे सीखूँगी।

अद्भुत साज़ न सज पाएगा –

सादा गीत बना लेंगे,

हम संग में कुछ गा लेंगे।

 

अपने सपने मुझसे कहना तुम।

जब टूट के स्वप्न बिखर जायें,

जब विश्वास ना उन पर रह जाये।

मैं टुकड़े सारे चुन दूँगी,

खुली हथेली पर रख दूँगी।

तुम मुट्ठी कस कर बंद कर लेना।

शायद थोड़े कम देखेंगे,

लेकिन सपने संग देखेंगे।

 

बातें अपनी कहना मुझसे।

जब कोई सुनने वाला ना हो,

जब सुख-दुःख बाँटने वाला ना हो।

यूँ लगे दोस्त सब छूट गए,

और लगे कि रिश्ते टूट गए।

कोशिश मैं करुँगी तब कि तुम

पक्के रिश्तों को जोड़ बढ़ो,

स्वयं से एक नाता जोड़ बढ़ो।

 

तुम हाथ बढ़ा देना अपना,

बोझिल मन लगने लगे अगर

और मुश्किल लगने लगे डगर।

मैं तुमको ना आँकूँगी

ना पैमानों पर नापूँगी।

गुलज़ार राह न हो फिर भी,

हम हाथ थाम संग चल लेंगे,

कुछ पल हमराही बन लेंगे।